
धान की खेती में गिरावट! पराली के नए नियम जानें। धान उत्पादन में बदलाव और पराली प्रबंधन की जरूरी जानकारी आसान भाषा में जानें
धान की खेती में गिरावट! पराली जलाने पर नए नियम, किसान जानें पूरी बात
धान की खेती में इस समय कई तरह के बदलाव देखने को मिल रहे हैं, पराली प्रबंधन और नए नियम चर्चा में हैं। किसान इन नियमों और पराली जलाने के सही तरीकों को समझ लें। इस लेख में आप धान की खेती में गिरावट, पराली जलाने से जुड़े नियम, और किसानों के लिए जरूरी जानकारी आसान भाषा में जानेंगे।
धान की खेती में गिरावट की क्या वजह है?
धान की खेती के रकबे में इस साल कमी दर्ज की गई है। 4 सितंबर 2026 तक धान की बुआई करीब 421.82 लाख हेक्टेयर में हुई, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह 438.19 लाख हेक्टेयर थी। कमी के पीछे मौसमी बदलाव, बारिश का समय, पानी की उपलब्धता, और कुछ किसानों का दूसरी फसलों की ओर रुख करना शामिल हो सकता है। हालांकि, सिर्फ रकबे के आंकड़ों से उत्पादन में कितनी गिरावट होगी, यह तय नहीं होता—अंतिम उत्पादन मौसम और पैदावार पर भी निर्भर करेगा।
इस साल धान की बुआई में क्या बदलाव आया?
इस साल धान की बुवाई के रकबे में कमी दर्ज हुई है। 4 सितंबर 2026 तक करीब 421.82 लाख हेक्टेयर में धान बोया गया, जबकि पिछले साल इसी समय यह 438.19 लाख हेक्टेयर था। कुछ राज्यों में रकबा घटा, कुछ में बढ़ा; कुल मिलाकर बोआई का रकबा पिछले साल से कम रहा।

पराली जलाने पर क्या हैं नए प्रस्तावित नियम?
पराली जलाने को रोकने के लिए नए ड्राफ्ट नियमों का प्रस्ताव रखा गया है। इसके तहत पराली जलाने वाले किसानों की जमीन के राजस्व रिकॉर्ड में “रेड एंट्री” दर्ज करने का प्रावधान प्रस्तावित है, जो 15 महीने तक रह सकती है। दोबारा नियम तोड़ने या पर्यावरणीय मुआवजा न देने पर इसकी अवधि बढ़ाई जा सकती है। इन प्रस्तावित नियमों का उद्देश्य पराली जलाने की घटनाओं को कम करना और फसल अवशेष के सही प्रबंधन को बढ़ावा देना है। ध्यान रखें, ये अभी प्रस्तावित नियम हैं, इसलिए इन्हें अंतिम लागू नियम न मानें। धान की खेती में गिरावट! पराली के नए नियम जानें
किसान पराली जलाने के बजाय क्या कर सकते हैं?
- पराली को जलाने के बजाय खेत में ही मिलाएँ।
- हैप्पी सीडर, सुपर सीडर जैसी मशीनों का इस्तेमाल करें।
- पराली को पशुओं के चारे के रूप में उपयोग कर सकते हैं।
- पराली से कंपोस्ट या जैविक खाद तैयार कर सकते हैं।
- प्रबंधन से खेत में जैविक पदार्थ बढ़ाने और धुएँ का प्रदूषण कम करने में मदद मिलती है।

धान किसानों के लिए जरूरी सावधानियां
धान किसानों को पराली जलाने से बचना चाहिए और स्थानीय नियमों की जानकारी रखनी चाहिए। पराली का सही प्रबंधन करें, सरकार द्वारा जारी निर्देशों और स्थानीय प्रशासन से अपडेट लेते रहें, कृषि मशीनों का उपयोग करें, और अगली फसल की तैयारी में मिट्टी व पानी की स्थिति का ध्यान रखें। किसी भी प्रस्तावित नियम को अंतिम नियम मानने से पहले आधिकारिक जानकारी जरूर चेक करें।
आने वाले दिनों में किसानों को किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?
आने वाले दिनों में किसानों को धान की फसल और पराली प्रबंधन पर विशेष ध्यान देना चाहिए। पराली जलाने से बचें और सही प्रबंधन का तरीका अपनाएं, सरकार व स्थानीय प्रशासन के नए निर्देशों की जानकारी लेते रहें, खेत की मिट्टी और नमी के अनुसार अगली फसल की तैयारी करें, ज़रूरत पड़ने पर कृषि मशीनों की मदद से पराली का प्रबंधन करें, और किसी भी नए नियम की जानकारी के लिए आधिकारिक स्रोतों पर भरोसा करें।
धान की खेती के रकबे में इस साल कमी दिखी है, और किसानों के लिए पराली प्रबंधन अब और भी जरूरी हो गया है। पराली जलाने से बचें और हैप्पी सीडर, सुपर सीडर, कम्पोस्ट जैसे तरीकों का इस्तेमाल करें। रेड एंट्री जैसे नियम अभी प्रस्तावित हैं, इसलिए अंतिम सरकारी निर्देश जरूर चेक करें। सही जानकारी और बेहतर प्रबंधन से किसान उपज और पर्यावरण दोनों की सुरक्षा में योगदान दे सकते हैं। धान की खेती में गिरावट! पराली के नए नियम जानें PM-KISAN आधिकारिक वेबसाइट: https://pmkisan.gov.in मक्के की खेती: सही समय, आसान तरीके और अच्छी पैदावार
Pingback: गर्मियों में स्नेक प्लांट की देखभाल: कम पानी में हरे पत्ते - KrishiPlus: Medicinal Plant & Organic Farming Guide